भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूह की ऊर्जा रणनीति में एक बार फिर बदलाव देखने को मिला है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने करीब डेढ़ साल के लंबे अंतराल के बाद वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात दोबारा शुरू किया है। इस नई खरीद में कंपनी ने लगभग 20 लाख बैरल तेल का एक विशाल शिपमेंट मंगाया है। यह कदम ऐसे वक्त उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति और कीमतों को लेकर हालात तेजी से बदल रहे हैं,
भारत अमेरिका ट्रेड डील
हाल के दिनों में भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौता भी सामने आया है। इस करार के तहत भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले कुछ निर्यात उत्पादों पर लगने वाले शुल्क में राहत दी गई है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को रूस से कच्चे तेल की खरीद में कटौती से जोड़कर पेश किया था।हालांकि भारत सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिर भी जानकार मानते हैं कि भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित करने के लिए कई देशों से तेल खरीदने की नीति पर काम कर रहा है, ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता न रहे।
वेनेजुएला और भारत का पुराना रिश्ता
भारत और वेनेजुएला के बीच कच्चे तेल का कारोबार पहले से ही स्थापित रहा है। वर्ष 2019 में वेनेजुएला से होने वाले कुल तेल निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा भारत को आपूर्ति किया जाता था, जो दोनों देशों के पुराने ऊर्जा संबंधों को दर्शाता है।उस समय रिलायंस और अन्य भारतीय कंपनियां अमेरिका से मिली विशेष छूट के तहत वेनेजुएला से तेल आयात कर रही थीं। बाद में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह व्यापार लगभग ठप हो गया। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और पुराने रिश्ते एक बार फिर मजबूत होते नजर आ रहे हैं।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह कदम
रिलायंस द्वारा लिया गया यह कदम केवल कारोबारी लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा जुड़ाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा से भी है। विभिन्न देशों से कच्चा तेल मंगाने की रणनीति से आपूर्ति व्यवस्था ज्यादा मजबूत बनती है और किसी एक क्षेत्र में संकट की स्थिति पैदा होने पर देश पर उसका प्रभाव सीमित रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भारत अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और मध्य-पूर्व जैसे क्षेत्रों से तेल आयात को संतुलित तरीके से बढ़ा सकता है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पिछले साल के मध्य में वेनेजुएला से तेल आयात रोक दिया था। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक दबाव थे। हालांकि अब हालात बदलते दिख रहे हैं। अमेरिका की नीतियों में नरमी और वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच वेनेजुएला का तेल एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में लौट रहा है। रिलायंस द्वारा तेल खरीद दोबारा शुरू करना सिर्फ एक व्यावसायिक फैसला नहीं है, बल्कि यह भारत की लंबी अवधि की ऊर्जा रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है।
बीते कुछ वर्षों में रूस से सस्ता कच्चा तेल आयात
बीते कुछ वर्षों में भारत ने बड़ी मात्रा में रूस से सस्ता कच्चा तेल आयात किया है। यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तब भारत और चीन जैसे देशों को रूसी तेल रियायती दामों पर मिलने लगा। लेकिन हाल के महीनों में स्थिति बदलने लगी है। केप्लर के आंकड़े बताते हैं कि जून महीने में भारत रोजाना करीब 20 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल आयात कर रहा था, लेकिन जनवरी आते-आते यह मात्रा घटकर लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई।
भारत ने बड़ी मात्रा में रूस से सस्ता कच्चा तेल आयात
यह स्तर नवंबर 2022 के बाद सबसे कम माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार, भारत रूस से तेल की खरीद पूरी तरह खत्म करने के पक्ष में नहीं है, लेकिन उस पर निर्भरता को चरणबद्ध तरीके से कम किया जा रहा है। इसी सोच के तहत वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोतों से तेल आयात को फिर से बढ़ावा दिया जा रहा है।
अमेरिका की भूमिका भी अहम
इस पूरे घटनाक्रम में संयुक्त राज्य अमेरिका की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। अमेरिका ने हाल ही में वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं, लेकिन साथ ही तेल उद्योग से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में ढील भी दी है। अमेरिका की इस रणनीति के पीछे उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना माना जा रहा है। इसी नीति के चलते वेनेजुएला का तेल दोबारा वैश्विक खरीदारों तक पहुंचने लगा है।




