देश में ट्रेन से सफर करने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक अच्छी और राहत की बात सामने आई है। भारतीय रेलवे के एक बड़े फैसले के बाद लगभग 10 मुख्य ट्रेनों से अब 'सुपरफास्ट' का नाम हटा दिया गया है। ये बदलाव अप्रैल के बीच में, 13 से 16 अप्रैल तक लागू होगा। इस फैसले से तो सीधा फायदा यात्रियों को ही होगा। सुपरफास्ट वाला टैग हटते ही इन ट्रेनों का टिकट थोड़ा सस्ता हो जाएगा। लग रहा है रेलवे ने यह कदम यात्रियों की उन पुरानी शिकायतों को दूर करने के लिए उठाया है, जो काफी समय से चल रही थीं।
क्यों हटा सुपरफास्ट का दर्जा
एक ट्रेन को 'सुपरफास्ट' तब कहते हैं जब उसकी औसत रफ्तार 55 किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा हो। पर अब जिन ट्रेनों से यह 'टैग' हट रहा है, असल में वे इतनी ज्यादा जगहों पर रुकती हैं कि उनकी स्पीड कम हो जाती है। रेलवे ने जाँच की तो पता चला कि ये ट्रेनें सुपरफास्ट की रफ्तार से चल ही नहीं रही थीं, बल्कि ज्यादा ठहराव के कारण इनकी औसत चाल एक आम एक्सप्रेस ट्रेन जितनी ही हो गई थी। फिर भी लोगों से सुपरफास्ट का किराया लिया जा रहा था। इसी गड़बड़ी को खत्म करने के लिए रेलवे ने यह फैसला लिया है।
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अगर ट्रेन लेट हुई या रद्द हो गई, तो कई यात्रियों को परेशानी होगी। इसका सीधा असर रोज यात्रा करने वाले लोगों पर भी पड़ेगा। रेलवे ने कुछ खास ट्रेनों से सुपरफास्ट का नाम हटा दिया है, क्योंकि वे पहले सुपरफास्ट नहीं चल पाती थीं।प्रयागराज रामबाग – हावड़ा विभूति एक्सप्रेस ट्रेन ३१ स्टेशनों पर रुकेगी।
हावड़ा - कालका नेताजी एक्सप्रेस प्रयागराज जंक्शन के रास्ते कुल 38 स्टेशनों पर रुकेगी, यह खबर उन सभी लोगों के लिए है जो इन ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं।
इनके अलावा कुछ और रेलगाड़ियाँ भी इस सूचि में थीं, जिनकी रफ़्तार अब सुपरफास्ट रेलगाड़ियों जैसी नहीं रह गयी थी। जैसे ही इन ट्रेनों से "सुपरफास्ट" का टैग हटेगा, इनके नंबर भी बदल जाएंगे। वजह ये है कि सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए नंबरों की एक अलग सीरीज होती है, और जब ये अब सुपरफास्ट नहीं रहेंगी, तो इन्हें उस सीरीज में रखने का कोई मतलब नहीं है। जो मुसाफ़िर यात्रा कर रहे हैं, उनको कितनी आसानी मिलेगी?
इस फैसले से सबसे ज़्यादा फायदा किराए में कमी के तौर पर देखने को मिलेगा। अभी तक सुपरफास्ट ट्रेनों में यात्रियों से जो एक्स्ट्रा चार्ज लिया जाता था, वो अब नहीं लिया जाएगा।
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मतलब, हर सफर में यात्रियों के पैसे बचेंगे, खासकर उन लोगों के लिए जो हर दिन ट्रेन से सफर करते हैं या दूर का सफर तय करते हैं। यात्रियों ने शिकायत की थी कि जो खाना परोसा जाता है वह बस ठीक-ठाक है, पानी की कमी है और जो स्टाफ है, वह कुछ खास मदद नहीं करता। ज्यादातर यात्री रेलवे से पूछते थे कि जब ट्रेन ठीक से सुपरफास्ट स्पीड से नहीं चल रही है, फिर भी सुपरफास्ट चार्ज क्यों लिया जाता है?सही है न कि अब आप उस तरह से अपने विचारों को व्यक्त कर सकते हैं, जैसा कि आप अपने दोस्तों या परिवार से बात करते समय करते हैं, है न? मेरे लिए, यह एक बहुत ही ज़रूरी बदलाव है। अब हमें इन सब चीजों को बहुत गंभीरता से लेना होगा और यह समझना होगा कि बातचीत को और कितना बेहतर बनाया जा सकता है। यात्रियों ने बताया कि ट्रेनें अक्सर लेट हो जाती थीं, और रास्ते में बहुत देर तक रुकती थीं, जिससे यात्रा और भी लंबी हो जाती थी. फिर भी, टिकट के दाम काफी ज़्यादा थे.
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रेलवे अधिकारी ने कहा
इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए, रेलवे ने ट्रेनों की स्पीड और स्टॉपेज की समीक्षा की है, और इसी के आधार पर यह फैसला लिया गया है। रेलवे अधिकारी ने कहा, "हमारी तरफ से जो हो सकता था, हमने कर दिया, लेकिन अभी भी एक चुनौती है. हम इस समस्या को सुलझाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.
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इस कदम से किराया काफी हद तक ठीक हो जाएगा। लोगों को अब कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे, जिससे उनकी जेब पर ज़्यादा भार नहीं पड़ेगा।
इससे रोज आने-जाने वाले लोगों और दूसरे सभी यात्रियों को काफी आसानी होगी.
रेलवे यह भी कहती है किट्रेन का असली दर्जा जानने के लिए, हमें उसकी रफ्तार और चलने के तरीके को देखना चाहिए, नाम से कुछ नहीं होता।




