दिल्ली–एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा सरकार के लिए एक और झंझट बनती जा रही है। हर वर्ष सर्दियों में आने वाली मोटी स्मॉग की चादर, सांस लेने में तकलीफ़ और अस्पतालों में स्क्रॉड लगातार इस बात की याद दिलाती रही है कि हम अब वायु प्रदूषण को पर्यावरण से जुड़ी समस्या समझते ही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की सेहत को प्रभावित करती हुई गंभीर समस्या समझते हैं। इसी दौरान सरकार भी अपने पुराने वाहनों पर और पिछले से अधिक कड़ी नीती बनाने को तैयार है।
चौंकाने वाले आँकड़े- AQI और सेहत
वायु प्रदूषण के खतरों को लेकर समिति का अपना प्रस्ताव भी बहुत ही चौंकाने वाला तथ्य प्रस्तुत करता है। कहते हैं, जब दिल्ली का AQI 250 से ऊपर जाएगा तो एक नवजात शिशु रोजाना 10 से 15 सिगरेट के बराबर प्रदूषण सांस के माध्यम से अपने शरीर दोनों में ले जाता है।हम यह तथ्य स्पष्ट कर देते हैं कि प्रदूषण वृद्ध लोगों के लिए ही नहीं बल्कि बच्चे के लिए भी कितना हैनिकारक हो सकता है।
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए नया रोडमैप
प्रदूषण पर काबू पाने के लिए एक नए तरीके की जरूरत है।वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), जो वायु को साफ रखने के लिए काम करती है, दिल्ली की सड़कों से उन गाड़ियों को हटाने का एक नया और पूरा प्लान बना रही है जिनसे प्रदूषण फैलता है। इस प्लान का मुख्य विचार, धीरे-धीरे करके शहर की हवा को ऐसी बनाना है कि लोग इसमें आसानी से साँस ले सकें और जहरीली हवा से होने वाली बीमारियों से बच सकें।
दिल्ली में अब पुराने BS I, BS II और BS III गाड़ियाँ सड़कों पर नहीं दिखेंगी, ऐसा प्रस्ताव आया है। सिर्फ इतना ही नहीं, अगले कुछ सालों में BS IV गाड़ियों को भी धीरे-धीरे हटाने की तैयारी है। सरकार इस बारे में सोच रही है।
पुरानी गाड़ियां कब और कैसे हटेंगी, यह एक बड़ा सवाल है। नई स्क्रैपेज नीति कहती है कि अगर आपकी गाड़ी 15 साल से ज़्यादा पुरानी है, तो आपको उसे स्क्रैप करवाना होगा। इससे प्रदूषण कम होगा और नई गाड़ियों को बढ़ावा मिलेगा। यह एक बेहतरीन तरीका है बदलाव लाने का।
एक रिपोर्ट के हिसाब से, इस मुद्दे के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी ने ड्राफ्ट रोडमैप बनाया है। इस समिति के अध्यक्ष हैं अशोक झुनझुनवाला, जो IIT मद्रास में प्रोफेसर हैं। ये प्लान अभी हितधारकों से राय और फीडबैक लेने के लिए लोगों के साथ बांटा गया है।
ड्राफ्ट में कुछ खास बातें बताई गई हैं: फौरन ही BS I, BS II और BS III गाड़ियों को बंद कर देना चाहिए। BS IV गाड़ियाँ जो अभी हमारी सड़कों पर दौड़ रही हैं, उन्हें अगले पाँच सालों में हमें धीरे-धीरे हटाना होगा। हम चाहते हैं कि 2035 और 2040 के बीच BS VI वाली गाड़ियों को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना बने।
इसका मतलब है कि सरकार तुरंत सारी गाड़ियां बंद करने के बजाय, आराम से, सोच-समझकर रास्ते पर चलना चाहती है।
आम लोगों की जिंदगी में क्या बदलाव आ सकता है, यही सवाल है.
सरकार को यह भी पता है कि बीते कुछ सालों में बहुत से लोगों ने महंगे BS VI गाड़ियाँ खरीदी हैं। ऐसे में उन्हें अचानक बंद कर देना ठीक नहीं होगा, न ही यह सही लगेगा। शायद इसी वजह से BS VI कारों और बाइक के लिए 10 से 15 साल का 'ट्रांजिशन पीरियड' देने पर सोचा जा रहा है। नवंबर से जनवरी के महीनों में जब प्रदूषण बहुत बढ़ जाता है, तब BS IV गाड़ियों पर कुछ समय के लिए रोक लगाई जा सकती है या उनके इस्तेमाल की सीमा तय की जा सकती है. यह एक और बहुत महत्वपूर्ण सुझाव है जिससे सर्दियों में होने वाले स्मॉग को थोड़ा कम किया जा सकता है.
सरकार समझा रही है कि इस योजना का असली मकसद सिर्फ पुरानी गाड़ियां हटाना नहीं है, इसका मतलब है कि हम प्रदूषण कम कर सकें और लोगों को थोड़ी सांस लेने की आजादी मिल सके। तो ये जो रास्ता चुना गया है ना, इसे एकदम से लागू नहीं किया जाएगा। धीरे-धीरे करेंगे ताकि आम आदमी पर एक साथ आर्थिक या मानसिक बोझ न पड़े।




